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Virendra Mer

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bihari-satsai

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मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि सोई l जा तन की झाईं परै श्यामु हरित दुति होई ll भव-बाधा = संसार के कष्ट, जन्ममरण का दु:ख नागरि =...