Bhaj Mann Charan-Kaval Avinasi

Bhaj Mann Charan-Kaval Avinasi

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Meerabai poems in hindiभज मन चरण-कंवल अबिनासी।
जेताइ दीसै धरण-गगन बिच, तेताइ सब उठ जासी।
इस देही का गरब न करणा, माटी में मिल जासी।
यो संसार चहर की बाजी, सांझ पडयां, उठ जासी।
कहा भयो तीरथ ब्रत कीने, कहां लिए करवत कासी?
कहा भयो है भगवा पह्रयाँ, घर तज भये सन्यासी?
जोगी होइ जुगत नहि जाणी, उलट जनम फिर आसी।
अरज करौं अबला कर जोरे, स्याम तुम्हारी दासी।
‘मीरां’ के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम की फाँसी।

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