Bhawani Prasad Mishra

Bhawani Prasad Mishra

all poems and poetry of Bhawani Prasad Mishra in Hindi.
Bhawani Prasad Mishra

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हवा वैसाख की राशि राशि पत्ते पेडो के नीचे के राशि राशि झरे बिखरे सूखे फूल लेकर चलेगी चल देगी ...
Bhawani Prasad Mishra

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असंदिग्ध एक उजाला टूटा बिजली बन कर शिखर पर मेरी दृष्टि के और डर कर मैंने बंद कर ली अपनी...
Bhawani Prasad Mishra

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मेरे वृन्त पर एक फूल खिल रहा है उजाले की तरफ़ मुंह किये हुए और उकस रहा है एक कांटा भी...
Bhawani Prasad Mishra

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लाख शब्दों के बराबर है एक तस्वीर ! मेरे मन में है एक ऐसी झाँकी जो मेरे शब्दों ने कभी नहीं आँकी शायद इसीलिए कि,...
Bhawani Prasad Mishra

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हो दोस्त या कि वह दुश्मन हो, हो परिचित या परिचय विहीन तुम जिसे समझते रहे बड़ा या जिसे मानते रहे दीन यदि कभी...
Bhawani Prasad Mishra

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तुम काग़ज़ पर लिखते हो वह सड़क झाड़ता है तुम व्यापारी वह धरती में बीज गाड़ता है । एक आदमी घड़ी बनाता एक बनाता...