Bhawani Prasad Mishra

Bhawani Prasad Mishra

all poems and poetry of Bhawani Prasad Mishra in Hindi.
Bhawani Prasad Mishra

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तुम काग़ज़ पर लिखते हो वह सड़क झाड़ता है तुम व्यापारी वह धरती में बीज गाड़ता है । एक आदमी घड़ी बनाता एक बनाता चप्पल इसीलिए यह बड़ा और वह...
Bhawani Prasad Mishra

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पहले इतने बुरे नहीं थे तुम याने इससे अधिक सही थे तुम किन्तु सभी कुछ तुम्ही करोगे इस इच्छाने अथवा और किसी इच्छाने , आसपास के लोगों...
Bhawani Prasad Mishra

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जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ, मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ, मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ! जी, माल देखिए, दाम बताऊँगा, बेकाम...