Bhawani Prasad Mishra

Bhawani Prasad Mishra

all poems and poetry of Bhawani Prasad Mishra in Hindi.
Bhawani Prasad Mishra

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बुरी बात है चुप मसान में बैठे-बैठे दुःख सोचना, दर्द सोचना ! शक्तिहीन कमज़ोर तुच्छ को हाज़िर नाज़िर रखकर सपने बुरे देखना ! टूटी हुई बीन...
Bhawani Prasad Mishra

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तुमसे मिलकर ऐसा लगा जैसे कोई पुरानी और प्रिय किताब एकाएक फिर हाथ लग गई हो   या फिर पहुंच गया हूं मैं किसी पुराने ग्रंथागार में   समय की खुशबू प्राणों में...
Bhawani Prasad Mishra

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साल शुरू हो दूध दही से साल खत्म हो शक्कर घी से पिपरमैंट, बिस्कुट मिसरी से रहें लबालव दोनों खीसे मस्त रहें सड़कों पर...
Bhawani Prasad Mishra

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एक सीध में दूर-दूर तक गड़े हुए ये खंभे किसी झाड़ से थोड़े नीचे , किसी झाड़ से लम्बे । कल ऐसे चुपचाप खड़े थे जैसे...
Bhawani Prasad Mishra

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सूरज का गोला, इसके पहले ही कि निकलता, चुपके से बोला,हमसे - तुमसे इससे - उससे कितनी चीजों से, चिडियों से पत्तों से , फूलो - फल से, बीजों...
Bhawani Prasad Mishra

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अब क्या होगा इसे सोच कर, जी भारी करने मे क्या है, जब वे चले गए हैं ओ मन, तब आँखें भरने मे क्या...