Bhawani Prasad Mishra

Bhawani Prasad Mishra

all poems and poetry of Bhawani Prasad Mishra in Hindi.
Bhawani Prasad Mishra

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हवा का ज़ोर वर्षा की झड़ी, झाड़ों का गिर पड़ना कहीं गरजन का जाकर दूर सिर के पास फिर पड़ना उमड़ती नदी का खेती...
Bhawani Prasad Mishra

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लाओ अपना हाथ मेरे हाथ में दो नए क्षितिजों तक चलेंगे   हाथ में हाथ डालकर सूरज से मिलेंगे   इसके पहले भी चला हूं लेकर हाथ में हाथ मगर वे हाथ किरनों...
Bhawani Prasad Mishra

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पी के फूटे आज प्यार के पानी बरसा री हरियाली छा गई, हमारे सावन सरसा री बादल छाए आसमान में, धरती...
Bhawani Prasad Mishra

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बूंद टपकी एक नभ से किसी ने झुक कर झरोखे से कि जैसे हंस दिया हो हंस रही-सी आंख ने जैसे किसी को कस दिया हो ठगा सा कोई...
Bhawani Prasad Mishra

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सूरज ने ऊपर मेरे घर की छत पर हल चला दिया है और उतर कर उसने नीचे मेरे आँगन...
Bhawani Prasad Mishra

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जिन्दगी में कोई बड़ा सुख नहीं है, इस बात का मुझे बड़ा दु:ख नहीं है, क्योंकि मैं छोटा आदमी हूँ, बड़े सुख...