Gopaldas "Neeraj"

Gopaldas "Neeraj"

all poems and poetry of Gopaldas "Neeraj" in Hindi.
Gopaldas "Neeraj"

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अब तो मुझे न और रुलाओ! रोते-रोते आँखें सूखीं, हृदय-कमल की पाँखें सूखीं, मेरे मरु-से जीवन में तुम मत अब सरस सुधा बरसाओ! अब...
Gopaldas "Neeraj"

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क्यों कोई मुझसे प्यार करे! अपने मधु-घट को ठुकरा कर मैंने जग के विषपान किए ले लेकर खुद अभिशाप हाय, मैंने जग को वरदान...
Gopaldas "Neeraj"

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मैं रोदन ही गान समझता! उर-पीड़ा के अभिशापित दल जो नयनों में रहते प्रतिपल- आँसू के दो-चार क्षार कण, आज इन्हें वरदान समझता। मैं...
Gopaldas "Neeraj"

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रोने वाला ही गाता है! मधु-विष हैं दोनों जीवन में दोनों मिलते जीवन-क्रम में पर विष पाने पर पहले मधु-मूल्य अरे, कुछ बढ़ जाता...
Gopaldas "Neeraj"

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है नहीं दिखता तिमिर का छोर! आँख की गति है जहाँ तक तम अरे, बस, तम वहाँ तक दूर धुँधली दिख रही पर सित...
Gopaldas "Neeraj"

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तब याद किसी की आती है! मधुकर गुन-गुन धुन सुन क्षण भर कुछ अलसा कर, कुछ शरमा कर जब कमल-कली धीरे-धीरे निज घूँघट-पट खिसकाती...