Kaka Hathrasi

Kaka Hathrasi

all poems and poetry of Kaka Hathrasi in Hindi.
Kaka Hathrasi

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प्रकृति बदलती क्षण-क्षण देखो, बदल रहे अणु, कण-कण देखो| तुम निष्क्रिय से पड़े हुए हो | भाग्य वाद पर अड़े हुए हो| छोड़ो मित्र !...
Kaka Hathrasi

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भोलू तेली गाँव में, करै तेल की सेल गली-गली फेरी करै, 'तेल लेऊ जी तेल' 'तेल लेऊ जी तेल', कड़कड़ी ऐसी बोली...
Kaka Hathrasi

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सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा हम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारा सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है हड़ताल क्यों है...
Kaka Hathrasi

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'काका' वेटिंग रूम में फँसे देहरादून । नींद न आई रात भर, मच्छर चूसें खून ॥ मच्छर चूसें खून, देह घायल कर डाली । ...
Kaka Hathrasi

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वंदन कर भारत माता का, गणतंत्र राज्य की बोलो जय। काका का दर्शन प्राप्त करो, सब पाप-ताप हो जाए क्षय॥ मैं अपनी त्याग-तपस्या...
Kaka Hathrasi

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बिना टिकट के ट्रेन में चले पुत्र बलवीर जहाँ ‘मूड’ आया वहीं, खींच लई ज़ंजीर खींच लई ज़ंजीर, बने गुंडों के नक्कू...