Shivmangal Singh Suman

Shivmangal Singh Suman

all poems and poetry of Shivmangal Singh Suman in Hindi.
a Poem by Shivmangal Singh Suman

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यह हार एक विराम है जीवन महासंग्राम है तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं। वरदान माँगूँगा नहीं।। स्‍मृति सुखद प्रहरों के...
a Poem by Shivmangal Singh Suman

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हम पंछी उन्‍मुक्‍त गगन के पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे, कनक-तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट जाऍंगे। हम बहता जल पीनेवाले मर जाऍंगे भूखे-प्‍यासे, कहीं...
a Poem by Shivmangal Singh Suman

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इस जीवन में बैठे ठाले ऐसे भी क्षण आ जाते हैं जब हम अपने से ही अपनी बीती कहने लग जाते हैं। तन खोया-खोया-सा...
a Poem by Shivmangal Singh Suman

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मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेष एक भी कण स्नेह का जब तक रहेगा शेष। हाय जी भर देख लेने दो मुझे मत...
a Poem by Shivmangal Singh Suman

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जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला उस उस राही को धन्यवाद। जीवन अस्थिर अनजाने ही हो जाता पथ पर मेल कहीं सीमित पग-डग, लम्बी...
a Poem by Shivmangal Singh Suman

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मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ। चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती, जल रहा हूँ क्योंकि...