Nahi Aiso Janam Barambar

Nahi Aiso Janam Barambar

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mirabai poems in hindiनहिं ऐसो जनम बारंबार।
का जानू कछु पुण्य प्रगटे, मानुसा अवतार।
बढ़त पल पल, घटत छिन छिन, जात न लागै बार।
बिरछ के ज्यों पात टूटे, बहुरि न लागै डार।
भौ सागर अति ज़ोर कहिए, अनंत ऊंडी धार।
राम नाम का बांध बेड़ा, उतर परले पार।
ज्ञान चौसर मंडी चोहटे, सरत पासा सार।
या दुनिया में रची बाज़ी, जीत भावें हार।
साधु, संत, महंत, ज्ञानी, चलत करत पुकार।
दास मीरां लाल गिरिधर, जींवणा दिन च्यार।

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