Sabhi Maa ko Dandvat Pranam

Sabhi Maa ko Dandvat Pranam

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“………….”माँ”………….”

माँ- दुःख में सुख का एहसास है,

माँ – हरपल मेरे आस पास है ।

माँ- घर की आत्मा है,

माँ- साक्षात् परमात्मा है ।

माँ- आरती है,

माँ- गीता है ।

माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,

माँ- उस रब का ही एक रूप है ।

माँ- तपती धूप में साया है,

माँ- आदि शक्ति महामाया है ।

माँ- जीवन में प्रकाश है,

माँ- निराशा में आस है ।

माँ- महीनों में सावन है,

माँ- गंगा सी पावन है ।

माँ- वृक्षों में पीपल है,

माँ- फलों में श्रीफल है ।

माँ- देवियों में गायत्री है,

माँ- मनुज देह में सावित्री है ।

माँ- ईश् वंदना का गायन है,

माँ- चलती फिरती रामायन है ।

माँ- रत्नों की माला है,

माँ- अँधेरे में उजाला है,

माँ- बंदन और रोली है,

माँ- रक्षासूत्र की मौली है ।

माँ- ममता का प्याला है,

माँ- शीत में दुशाला है ।

माँ- गुड सी मीठी बोली है,

माँ- दिवाली, होली है ।

माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,

माँ- की याद हमें अति की आई है ।

माँ- मेरी देवी और दुर्गा माई है,

माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।

माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।h

“अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ,

दुनिया की सभी माँओं को दंडवत प्रणाम करता हूँ ।

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