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poem

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जिंदगी सवारने की चाहत में, हम इतने मशगूल हो गए... चंद सिक्कों से तो रूबरू हुए, पर ज़िन्दगी से दूर हो गए.
Meerabai kavitayen in hindi

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नहिं ऐसो जनम बारंबार। का जानू कछु पुण्य प्रगटे, मानुसा अवतार। बढ़त पल पल, घटत छिन छिन, जात न लागै बार। बिरछ के ज्यों पात टूटे, बहुरि...
meerabai ki kritiyan

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1. छैल बिराणे लाख को हे अपणे काज न होइ। ताके संग सीधारतां हे, भला न कहसी कोइ। वर हीणों आपणों भलो हे, कोढी कुष्टि कोइ। जाके संग...
Gopaldas "Neeraj"

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अब के सावन में ये शरारत मेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई. आप मत पूछिए क्या हम पे...
Gopaldas "Neeraj"

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मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ तुम शहज़ादी रूप नगर की हो भी गया प्यार हम में तो बोलो मिलन कहाँ पर होगा ? मीलों जहाँ...

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खा...मो..श ! बोलो मत... एक भी आवाज़, एक भी सवाल, लबों की हल्की-सी जुम्बिश भी नहीं नहीं, एक हल्की-सी दबी हुई सिसकी भी नहीं ! ...