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pyar

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Subhadra Kumari Chauhan

0 1993
देव! तुम्हारे कई उपासक कई ढंग से आते हैं सेवा में बहुमूल्य भेंट वे कई रंग की लाते हैं धूमधाम से साज-बाज...
Kedarnath Agarwal

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गुम्बज के ऊपर बैठी है, कौंसिल घर की मैना । सुंदर सुख की मधुर धूप है, सेंक रही है डैना ।। तापस वेश नहीं...
Kedarnath Agarwal

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वह चिड़िया जो- चोंच मार कर दूध-भरे जुंडी के दाने रुचि से, रस से खा लेती है वह छोटी संतोषी चिड़िया नीले पंखों वाली...
Gulab Khandelwal

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आ, कि अब भोर की यह आख़िरी महफ़िल बैठे पहले तू बैठ, तेरे बाद मेरा दिल बैठे तेरी दुनिया थी अलग, तेरे निशाने थे कुछ और क्या...
Gulab Khandelwal

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आप क्यों दिल को बचाते हैं यों टकराने से! ये वो प्याला है जो भरता है छलक जाने से हैं वही आप, वही हम हैं, वही...