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saans

a Poem by Shivmangal Singh Suman

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तुम जो जीवित कहलाने के हो आदी तुम जिसको दफ़ना नहीं सकी बरबादी तुम जिनकी धड़कन में गति का वन्दन है तुम जिसकी कसकन...
Ramdhari Singh Dinkar

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घेरे था मुझे तुम्हारी साँसों का पवन, जब मैं बालक अबोध अनजान था। यह पवन तुम्हारी साँस का सौरभ लाता था। उसके कंधों पर चढ़ा ...
Makhanlal Chaturvedi

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प्राण अन्तर में लिये, पागल जवानी ! कौन कहता है कि तू विधवा हुई, खो आज पानी?   चल रहीं घड़ियाँ, चले नभ के सितारे, ...
Mahadevi Varma

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उड़ रहा नित एक सौरभ-धूम-लेखा में बिखर तन, खो रहा निज को अथक आलोक-सांसों में पिघल मन अश्रु से गीला सृजन-पल, औ' विसर्जन पुलक-उज्ज्वल, आ रही अविराम मिट...
Gopaldas "Neeraj"

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रुके न जब तक साँस, न पथ पर रुकना थके बटोही। साँसों से पहले ही जो पंथी पथ पर रुक जाता जग की नज़रों...
Gopaldas "Neeraj"

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सूनी-सूनी साँस की सितार पर गीले-गीले आँसुओं के तार पर एक गीत सुन रही है ज़िन्दगी एक गीत गा रही है ज़िन्दगी। चढ़ रहा...