Ya Braj me- a Poem by Meerabai

Ya Braj me- a Poem by Meerabai

0 107

mirabai poems in hindi

या ब्रज में कछु देख्यो री टोना।
लै मटुकी सिर चली गुजरिया,
आगे मिले बाबा नंदजी के छोना।
दधि को नाम बिसरि गयो प्यारी,
लैलेहु री कोई स्याम सलोना।
वृंदावन की कुंज गलिन में,
नेह लगाइ गयो मनमोहना।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,
सुंदर स्याम सुघर रस लोना।

Join the House of LOVE, LIFE n LOLZ

SIMILAR ARTICLES